राजनेताओं द्वारा मूवी का उपयोग क्यों?
'द केरला स्टोरी' जो कि एक मूवी है, उसे लेकर राजनेता कैसे अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा पूरी करने में लगे हैं। भारत में चुनाव होता है कि हम भारतीय एक अच्छा,ईमानदार,लोगों के जीवन को बेहतर बनाने वाला लीडर व नेता चुन सके, पर क्या चुनाव में ऐसी मूवी का रिलीज होना और राजनीतिक दलों का इस मूवी का उपयोग करना भारत के लोकतंत्र के लिए वाकई ठीक हैं?
मूवी और राजनीतिक दलों का कहना है कि सत्य घटना है। अगर यह वाकई सत्य है तो फिर सवाल खड़े होते हैं कि इतनी सारी लड़कियां गुमशुदा हो गई तो केंद्र में हिंदू विंग की सरकार है 2014 से अभी मई,2023 तक।
तो केंद्र ने ध्यान क्यों नहीं दिया?
दूसरा सवाल है कि इतनी सारी लड़कियां गुमशुदा हो गई तो थाने में एफआईआर कहा है?
तीसरा सवाल अगर एफआईआर हो गई थी तो पुलिस ने क्यों नहीं ढूँढा?
चोथा सवाल अगर वाकई कोई साजिश हुई है तो केंद्र में गृह मंत्री ने क्यों एक्शन नहीं लिया स्टेट पुलिस के खिलाफ?
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| सुप्रीम कोर्ट का आदेश केरला स्टोरी पर। |
यह प्रतीत करता है कि राजनेता जनता को डरा कर अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा पूरी करना चाहते हैं क्या भारत की जनता को इतनी समझ नहीं है कि कैसे राजनीतिक दलों ने उनकी धार्मिक भावना का उपयोग किया जा रहा है?
क्या राजनीतिक दलों के पास कोई योजना नहीं बची है कि वे जनता से वोट मांगने के लिए एक मूवी को दिखा रहे हैं?
ऐसा लगा रहा हैं कि भारत का लोकतंत्र का भविष्य खतरे में है। जनता कितने विश्वास से वोट देती हैं कि उनका नेता उनकी जिंदगी बेहतर बनाने के लिए योजनाएं बनाएगा, देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी दूर करेगा,देश की जनता को अच्छी आधुनिक शिक्षा और स्वास्थ्य प्रदान करवाएगा,पर नेता तो धर्म के नाम पर जनता के बीच नफरत का व्यापार कर रहा है, संविधान के बजाये धर्म की गुलामी कर रहा है।
क्या धर्म इतना बड़ा होगया है कि लोग संविधान और देश से पहले धर्म के नाम पर वोट डाल रहे हैं?
देश को आजाद करने के लिए क्या-क्या कुर्बानियां देनी पड़ी थी ये सब भूल कर हम देश को किस दिशा मे ले जा रहे हैं? क्या लोकतांत्रिक देश ऐसे होते हैं जहा चुनाव जीतने के लिए विशेष धर्म को टार्गेट किया जाता है? नहीं। अगर देश को विश्वगुरु बनाना है तो धार्मिक भावनाओ और धार्मिक कट्टरता से ऊपर उठ कर केवल देश को आधुनिक बनाने का ही सोचना होगा।
और अगर वाकई मूवी देखनी हो तो 'शूद्र द रासिंग', 'असुरा', 'जयंती', और ज्योति बा फुले, फूलन देवी जैसी मूवी देखो जो भारत के समाज की हकीकत बताती हैं।
जय भारत, जय संविधान, जय भीम

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