भारत का असली मूल निवासी कौन है?
भारत का असली मूल निवासी कोन है ? क्योंकि आये दिन minorities और मुसलमानों को टार्गेट कर के कहा जाता है कि तुम मुगल हो भारत में बाहर से आये थे। साथ ही साथ sc st obc समाज में आने वाली जाति के लोगों को गुलाम व अछूत माना जाता है। उन्हें कहीं मन्दिर तो कहीं घोड़ी चडने से रोका जाता है, और यह मान, कर और कह भी कोन रहा हैं हिन्दू धर्म के कट्टर लोग जिन्हें इतिहास का कुछ अता पता नहीं है जिन्होंने धर्म की किताबें ही पढी है। आइये जानते हैं प्रोफेसर राम पुनियानी से वे क्या कहते है - वीडियों
वे कहते हैं कि इतिहासकार genetic और डीएनए के आधार पर इस भारत की भूमि पर सबसे पहले 65 हजार साल पहले अफ्रीका से निकले आदिमानव आये और यही बस गये ओर आज उन्हें हम आदिवासी नाम से जानते हैं जो कि st में आते हैं । और यह बात इतिहासकार भी मानते हैं।
फिर 7 हजार साल पहले ईरान से किसान लोग आये जो हड्प्पा और मोहन-जो-दरों में बसे।
आर्य 2 हजार साल पहले आये।
सवाल आता है कि ये आर्य कोन है ?
तो सावरकर जिसे कहीं विपक्षी लोग माफी वीर सावरकर भी कहते हैं और कहीं लोग उनकी पूजा भी करते हैं, वे अपनी बुक हिन्दुत्व के chapter -2 में लिखते है की " वे अपनी जाति बंधुओं आर्यनवासी पारसियों से स्वतंत्र हो कर सिंधु नदी के इस पार आए । याने कि जों वर्तमान भारत भूमि पर अपनी आर्य जाति के पर्शियन बंधुओं से स्वतंत्र होकर आए। यानी ये साफ़ साफ़ दर्शाता है की आर्य विदेशी हैं। और सावरकर खुद स्वीकार कर रहे हैं की वे बाहर से आये हैं। और यहां पर यहां के मुलनिवासी आदिवासी टोलियां और समुदाय रहते थे।
वे आगे लिखते हैं की हुंड और लच्छवीयो ने भारत पर आक्रमण कर दिया या अधिकार हो गया । यानी वे अपनी जिन जाती बंधुओं से पीछा छुड़ा कर भारत आए थे वे भी इनके पीछे आ गये।
लच्छवी - indo-aryan जनजाति मुजफ्फरपुर बिहार में पाए जाते थे।
हुंड - तिब्बत की घाटियों में बसने वाला समुदाय जिसका मूल स्थान वोल्गा था। इस की दो शाखाएँ थी।
एक शाखा- वोल्गा में ही बसी रह गई।
दूसरी शाखा - फारस (ईरान) के राज वंश को खत्म किया था उसके बाद वे भारत की ओर बढ गई।
वे आगे बताते भी है क्यों,कैसे उन्होंने बुद्ध धर्म को खत्म कर हिन्दू धर्म की स्थापना की थी। हिन्दुत्व बुक को पढना जरूर।
तो अब यह जानने के बाद की भारत का असली मूल निवासी आदिवासी समुदाय है। तो क्या मुस्लिमों के साथ-साथ कट्टर हिन्दू धर्म के लोगों (rss) को भी भारत छोड़कर जाना चाहिए ?
इस पर प्रोफेसर राम पुनियानी कहते हैं कि "नागरिकता वाली सोच नई हैं इस भारत को हम सबने मिल कर बनाया है इसलिए 1950 में संविधान लागू होने के बाद जो यहां रह रहे हैं सभी भारत के नागरिक हैं।"
तो गर्व से कहो हिन्दू या मुस्लिम या सिख या ईसाई है ऐसा कहने की बजाय कहना चाहिए गर्व से कहो कि हम सब भारतीय हैं सबसे पहले। क्योंकि देश पहले है उसके आगे ना धर्म है ना ही दुनिया की कोई भी बेशकीमती चीज।
भारत का असली मूल निवासी कोन है यह सवाल का जवाब जानना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि आज भारत देश में धर्म की कट्टरता इतनी बड़ गई है कि लोग बिना कुछ सोचे समझे धर्म के नाम पर, हिन्दू मुस्लिम के नाम पर दंगे, हिंसा, नेता भड़काव भाषण और fake information से भारत की जनता को डरा कर सत्ता की चाबी अपने हक में रखना चाहते हैं, पर भारत देश का यह दुर्भाग्य है की भारत की जनता धार्मिक है और वैज्ञानिक तरीके से सोचने में सक्षम नहीं होती हैं, और नेता बहुत चालक हैं वह जनता को भड़काव भाषण देता है और धार्मिक कट्टर लोग fake information के आधार पर लोगों में नफरत का बीज़ बोते है, फिर वह बीज़ लोगों के सोचने का नजरिया और दिमाग दोनों हिंसा करने पर उतारु हो जाते हैं, धर्म को मानने वाले लोगों को लगता है कि विपक्षी व सामने वाले धर्म के लोगों की हर धार्मिक क्रिया कलाप उनके धर्म के लिए खतरा है फिर ये नफरत पनपते पनपते इतनी बढ़ जाती हैं कि दंगों और हिंसा की खबर टीवी अख़बारों पर आये दिन सुनने को मिलती हैं। फिर यही खबर का असर दूसरी जगहों पर होता है, ओर जहा होता है वहां भी कोई समझदार वैज्ञानिक सोच रखने वाले लोग नहीं होते हैं क्योंकि वहां भी धर्म को मानने वाले लोग होते हैं उनके मन और दिमाग में भी नफरत आ जाती हैं ओर वहा भी दंगे और हिंसा हो जाती हैं। और इस तरह दंगों ओर हिंसा साथ में नफरत का खेल का पहिया चलता रहता है। अब एंट्री होती हैं सुपर फ्लॉप नेताओ की, दंगों और हिंसा औ के बाद सुपर फ्लॉप नेता आता है पीड़ित धर्म के लोगों से सवाल जवाब कर्ता है और फिर सारा ठीकरा पुलिस और प्रशासन फोड़ देता है ओर लगे हाथ रूलिंग पार्टी की सरकारों को सवालों के घेरे में ले लेता है, ओर वो सुपर फ्लॉप नेता सामने वाले धर्म के लोगों के लिये पीड़ित धर्म के लोगों में नफरत का बीज़ भी डाल देता है और एक समझोता भी कर लेता है कि आने वाले चुनाव में हमारी पार्टी को वोट दे दोगे तो इस दंगो के आरोपियों को में सलाखों के पीछे डाल दूंगा। और धार्मिक कट्टर लोग इनके चेले बन जाते हैं और पार्टी का झंडा उठा लेते हैं और इस तरह से भारत में स्वतंत्र तरीके से चुनाव होता है ।
अब सवाल यह उठता है कि जो धर्म गुरु होते हैं वह क्या करते हैं इस मसले पर, उन्हें तो समझाना चाहिए धर्म के अनुयायी को ओर लोगों को, पर वे भी कुछ नहीं करते हैं क्योंकि वे भी पढे लिखे नहीं होते हैं ना ही उनकी वैज्ञानिक सोच होती हैं वे भी धर्म की भावनाओ में बह कर इस नफरत को आगे बढ़ाते हैं।
संविधान में लिखा है कि वैज्ञानिक सोच को बढ़ाना है पर धर्म है कि मानता नहीं, धर्म खुद को धर्मेन्द्र समझता है कहता है कि धर्म में या धर्म की परंपरा औ में जरा सा भी बदलाव से उनकी भावना अहात हो जाती हैं । भावना अहात का दुखड़ा रोने गाने अलापने लगते हैं। और इस तरह भारत में धर्म ही अपने अनुयायियों और धर्म को मानने वाले लोगों का वैज्ञानिक सोच का हक़ और अधिकार छिन रहा हैं।
सामने एक नया उदहारण है हिन्दू महासभा के संजय और जितेंद्र जो गौ रक्षा के नाम पर अवैध तरीके से मुस्लिम लोगों से पैसा उगाते थे। वीडियों ⤵️
मुस्लिम धर्म के लोग भी ऐसा कर रहे नया उदहारण है शाहरुख नाम के व्यक्ती ने चलती ट्रेन में आग लगा दी जिस से एक पुरुष, एक महिला ओर एक बच्चे की मौत हो गई। वीडियों ⤵️
ये दोनों उदहारण है कि कैसे धार्मिक लोग नफरत में खुद को हेवान बना रहे हैं। धर्म के नाम पर इंसानियत और मानवता को मार रहे हैं। सब अपने अपने धर्मों को श्रेष्ठ और प्राचीन ओर मानवता के लिए बेस्ट बताते हैं पर सब के सब धर्म मानवता की परिक्षा में फैल हो जाते है। इसलिए आप सभी से मेरी सलाह है कि धर्म के नाम पर कोई ऐसा कार्य ना करे ताकि लोग तुम्हें धार्मिक के बजाये आतंकवादी और देश द्रोही कहे। और धर्म के उन्हीं रीति रिवाजों को मानो जो वैज्ञानिक हो, अंधविश्वास ना करो धर्म पर वर्ना ये धर्म तुम्हारी दूरगाति तो करेगा साथ में देश और देश की आने वाली पीढ़ी की भी। और साथ में कहेंगे जो इतना सब पढने के बाद भी अक्ल नहीं आयी तो जिसे हिन्दू राष्ट्र चाहिए वे united kelasha नाम की जगह चले जाए और जिसे मुस्लिम राष्ट्र चाहिए वो पाकिस्तान,ईरान,इराक व अफगानिस्तान चले जाए। भारत संविधान से चलेगा ना कि तुम्हारी धार्मिक भावना औ से।
जय भारत, जय संविधान, जय भीम ।
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